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वर लग्न चक्र (D-1)
🌸 वधू (Bride) जन्म विवरण
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वधू लग्न चक्र (D-1)
२. मुहूर्त साधन एवं लग्न सारणी
कुल तिथियां
0
सर्वथा निर्दोष (0 दोष)
0
उत्तम (>85%)
0
मध्यम (65-84%)
0
वर्जित (<65%)
0
दिनांक एवं वार
पञ्चाङ्ग (तिथि, नक्षत्र, राशि)
चन्द्र / त्रिबल शुद्धि
सामर्थ्य (%)
शुभ लग्न समय
निर्णय
📜 10 Classical Mahadoshas Scrutiny (महादोष एवं नक्षत्र शोधन)
विवाह संस्कार में मुहूर्त चिंतामणि एवं बृहत्पाराशर होराशास्त्र अनुसार निम्नलिखित 10 महादोषों का पूर्ण निराकरण अनिवार्य है:
1. लत्ता दोष (Latta Dosha)सूर्य, मंगल, गुरु आदि ग्रहों की अग्र व पृष्ठ नक्षत्र दृष्टि।
2. पाताल दोष (Pata Dosha)व्यतीपात एवं वैधृति महापात युति का सूक्ष्म शोधन।
3. जामित्र दोष (Jamitra Dosha)चंद्रमा व लग्न से सप्तम भाव में क्रूर ग्रह की उपस्थिति।
4. वेध दोष (Vedha Dosha)पंचशलाका चक्र अनुसार विवाह नक्षत्र पर पापी ग्रह वेध।
5. बाण दोष (Bana Dosha)रोग, अग्नि, नृप, चोर व मृत्यु बाण विचार।
6. एकार्गल दोष (Ekargala Dosha)सूर्य नक्षत्र से विष्कम्भादि योगों का विषमय संचरण।
7. उपग्रह दोष (Upgraha Dosha)धूम, व्यतीपात, परिवेष, इंद्रचाप व केतु उपग्रह विचार।
8. दग्ध तिथि (Dagdha Tithi)सूर्य मास एवं वार अनुसार त्याज्य दग्ध तिथियों का त्याग।
✓ शास्त्रीय अपवाद एवं परिहार नियम (Exceptions & Parihar Rules)
यदि लग्न अथवा नवमांश बलवान हो (गुरु अथवा शुक्र केंद्र में स्थित हों), तो मुहूर्त चिंतामणि (श्लोक 48) अनुसार अनेक सामान्य दोष स्वतः निष्प्रभावी हो जाते हैं:
"केन्द्रे गुरुर्भृगुर्वाऽपि लग्ने वा नवमेऽपि वा। कोटिदोषान् निहन्त्याशु सूर्यस्तम इवोदितः॥"
🔍 तिथि-वार दोष एवं परिहार तालिका
📜 प्रामाणिक शास्त्रीय श्लोक (Authentic Granth Shlokas)
— मुहूर्त चिंतामणि (विवाह प्रकरणम्, श्लोक 14)
अर्थ: विवाह संस्कार में कन्या के लिए देवगुरु बृहस्पति का बल (ज्ञान, सौभाग्य) तथा वर के लिए भुवनभास्कर सूर्य का बल (तेज, सामर्थ्य) एवं दोनों के लिए चंद्र शुद्धि अनिवार्य है।
— बृहत्पाराशर होराशास्त्र (विवाह लक्षण अध्याय)
अर्थ: लत्ता, वेध, एकार्गल और उपग्रह आदि दोषों से रहित शुद्ध नक्षत्र में किया गया पाणिग्रहण संस्कार दांपत्य जीवन में अखंड सुख, संतति एवं समृद्धि प्रदान करता है।
🪔 वैदिक दोष शमन एवं शांति उपाय (Vedic Shanti Remedies)
🌺 श्री गौरी-शंकर सम्पुट पूजन
विवाह से पूर्व वर व वधू द्वारा रुद्राभिषेक एवं माँ कात्यायनी मंत्र का अनुष्ठान करने से जन्मकालीन व मुहूर्त सम्बंधी छोटे दोष विलीन हो जाते हैं।
☀️ सूर्य व गुरु अर्घ्य विधान
त्रिबल शुद्धि में यदि सूर्य या गुरु 4/8/12 में हों, तो हल्दी, कुंकुम व अक्षत युक्त तांबे के पात्र से प्रातः अर्घ्य दें एवं चने की दाल का दान करें।
🌙 चंद्र शांति व श्वेत दान
यदि चंद्र बल सामान्य हो, तो चांदी का चौकोर टुकड़ा अथवा श्वेत मिष्ठान्न का दान करके ॐ सों सोमाय नमः मंत्र के 108 जप से चंद्र को पुष्ट करें।
🔔 गोधूलि वेला व लग्न शुद्धि
शास्त्र अनुसार गोधूलि वेला में समस्त पापी वेधों का शमन होता है। यदि पाणिग्रहण लग्न स्थिर (वृषभ, सिंह, वृश्चिक, कुंभ) हो, तो दांपत्य सुदृढ़ रहता है।