महर्षि पाराशर द्वारा उपदेशित वैदिक ज्योतिष के सर्वोच्च ग्रंथ के सभी ९७ अध्यायों का सम्पूर्ण इंटरएक्टिव इनसाइक्लोपीडिया। खगोल-गणित, Jean Meeus 60-Term लूनर समीकरण, षोडशवर्ग, इंदु लग्न, त्रि-दशा और १० महादोषों की संपूर्ण गणितीय व शास्त्रीय व्याख्या।
चंद्रमा पृथ्वी का चक्कर लगाते हुए सूर्य, पृथ्वी के विषुवतीय उभार और प्रमुख ग्रहों के गुरुत्वाकर्षण से लगातार विचलित होता है। साधारण ऐप्स केवल स्थिर औसत गति मान लेते हैं।
जब चंद्रमा कर्क-सिंह या मीन-मेष जैसी गंडांत संधियों (Gandanta Cusps) पर होता है, तो Jean Meeus के ६० आवधिक पदों के बिना गणना करने पर नक्षत्र का चरण ही बदल जाता है! Patrika (shriramjiastro.in) इन सभी ६० पदों को लाइव हल करती है।
साधारण पंचांग लाहिड़ी अयनांश की एक स्थिर वार्षिक दर (~50.27" प्रति वर्ष) मान लेते हैं। किंतु पृथ्वी की धुरी के डगमगाने (Nutation) के कारण वास्तविक चित्रा तारा (Spica) प्रति क्षण डगमगाता है।
True Chitra Paksha का नियम है कि निरयण मेष ०° चित्रा तारे के ठीक १८०° सम्मुख होना चाहिए। IAU 4-Term Nutation को जोड़कर हमारी वेबसाइट वास्तविक समय का सत्य अयनांश निकालती है।
महर्षि पाराशर ने BPHS के अध्याय ६ में स्पष्ट कहा है: "विना षष्ट्यंशकेन तु न किञ्चिदपि लभ्यते" (बिना D60 के सूक्ष्म फलित असंभव है)।
D60 का एक भाग केवल ३० कला (0.5°) का होता है, जो हर २ मिनट में बदल जाता है! यदि सॉफ़्टवेयर में सब-आर्कसेकंड Meeus गणित नहीं है, तो D60 पूर्णतः अशुद्ध हो जाता है।
पाराशर ज्योतिष के अध्याय ३३ में धन-संपदा के लिए 'इंदु लग्न' (Indu Lagna / Wealth Ascendant) का विधान है। ग्रहों के कला-मानों के नवमेश-आधारित योग से यह बिंदु निकाला जाता है।
यदि इंदु लग्न में एकाधिक शुभ ग्रह हों या उसका स्वामी उच्च का हो, तो जातक करोड़पति या उद्योगपति बनता है। हमारी वेबसाइट का Dhana Yoga Engine इसे स्वतः निकालता है।
मुहूर्त चिंतामणि का अकाट्य नियम: यदि इन १० महादोषों में से एक भी महादोष विद्यमान हो, तो ३६ में से ३६ गुण मिलने पर भी विवाह वर्जित है!
साधारण वेबसाइट्स केवल ३६ गुण देखकर छुट्टी कर लेती हैं। Shri Ramji Astro (VMM) इन सभी १० महादोषों की स्वचालित खगोलीय स्क्रूटनी करता है।
सम्पूर्ण ३,९२५ प्रामाणिक श्लोक: प्रत्येक श्लोक का मूल संस्कृत पाठ, पद-छेद, अन्वय, विस्तृत फलित व्याख्या एवं Jean Meeus खगोलीय गणित।
सृष्टि के प्रादुर्भाव, परा-प्रकृति, त्रिगुण, महत्तत्त्व और काल-पुरुष के स्वरूप का दार्शनिक व खगोलीय निरूपण।
Universal Time & Chronology — Julian Day Epoch J2000.0 (JD = 2451545.0 + T*36525) | T = (JD - 2451545.0)/36525 | Mean Solar Anomaly M = 357.5291092 + 35999.0502909*T | Mean Obliquity eps0 = 23°26'21".448 - 46".8150*T - 0".00059*T^2 + 0".001813*T^3
अथैकदा मुनिश्रेष्ठं त्रिकलज्ञं पराशरम् । पप्रच्छोपेत्य मैत्रेयः प्रणिपत्य कृताञ्जलिः ॥ १॥
अथ एकदा मैत्रेयः त्रिकालज्ञं मुनिश्रेष्ठं पराशरं उपेत्य कृताञ्जलिः प्रणिपत्य पप्रच्छ।
एक समय तीनों कालों (भूत, भविष्य, वर्तमान) के सर्वज्ञ ज्ञाता मुनिश्रेष्ठ महर्षि पराशर के समीप जाकर शिष्य मैत्रेय ने दोनों हाथ जोड़कर विनीत भाव से प्रणाम करके प्रश्न पूछा।
Baseline Epoch JD0 = 2451545.0 (J2000.0) | Universal Time scale derivation.
भगवन् परमं पुण्यं गुह्यं वेदाङ्गमुत्तमम् । त्रिस्कन्धं ज्यौतिषं होरा गणितं संहितेति च ॥ २॥
भगवन्! परं पुण्यं गुह्यं उत्तमं वेदाङ्गं त्रिस्कन्धं ज्यौतिषं होरा गणितं संहिता इति च श्रूयते।
हे पूज्य भगवन्! परम पवित्र, वेदों के छह अंगों में सर्वोत्कृष्ट (नेत्र रूप) और परम रहस्यमयी ज्योतिष शास्त्र के तीन स्कन्ध हैं—होरा (जातक/फलित), गणित (सिद्धांत/खगोल) और संहिता (मेघ/शकुन/प्राकृतिक लक्षण)।
Tri-Skandha Ephemeris Architecture: Planetary Kinetics (Ganita) ⊗ Natal Positions (Hora) ⊗ Mundane Vectors (Samhita).
एतेष्वपि त्रिषु श्रेष्ठा होरेति श्रूयते मुने । त्वत्तस्तां श्रोतुमिच्छामि कृपया वद मे प्रभो ॥ ३॥
मुने! एतेषु त्रिषु अपि होरा श्रेष्ठा इति श्रूयते, प्रभो! त्वत्तः तां श्रोतुम् इच्छामि, कृपया मे वद।
हे मुनिवर! इन तीनों स्कंधों में भी मानव जीवन के सुख-दुःख व कर्मफल को प्रत्यक्ष करने वाली 'होरा शास्त्र' (फलित ज्योतिष) सर्वोच्च है। हे प्रभो! मैं आपके श्रीमुख से इसका श्रवण करना चाहता हूँ, कृपा करके मुझे उपदेश दें।
Natal Coordinate Reduction: Geocentric Ecliptic Longitude λ(t) = L0 + Δψ·cos(ε) - Ayanamsa.
कथं सृष्टिरियं जाता जगतश्च लयः कथम् । खस्थानां भूस्थतानां च सम्बन्धं वद विस्तरात् ॥ ४॥
इयं सृष्टिः कथं जाता, जगतः लयः कथं, खस्थानां भूस्थानां च सम्बन्धं विस्तरात् वद।
मैत्रेय मुनि ने मूल ब्रह्मांडीय प्रश्न पूछा: यह सम्पूर्ण चराचर सृष्टि कैसे उत्पन्न हुई? इस जगत का प्रलय कैसे होता है? और आकाश में भ्रमण करने वाले सूर्य-चन्द्र आदि खगोलीय पिण्डों का पृथ्वी पर स्थित प्राणियों के साथ क्या प्रत्यक्ष सम्बंध है? कृपया विस्तार से समझाएं।
Astrophysical Resonance: Gravitational Potential Φ = -G·M/r | Planetary Tidal Accelerations a_tide = 2·G·M·R_earth / r^3.
साधु पृष्टं त्वया विप्र लोकानुग्रहकारिणा । अथाहं परमं ब्रह्म तच्छक्तिं भारतीं पुनः ॥ ५॥
विप्र! त्वया साधु पृष्टं यतः लोकानुग्रहकारिणा अस्ति। अथ अहं परं ब्रह्म तच्छक्तिं पुनः भारतीं (सरस्वतीं) च नत्वा...
महर्षि पराशर ने प्रसन्न होकर कहा: हे विप्र मैत्रेय! तुमने सम्पूर्ण संसार के कल्याण हेतु अत्यंत उत्तम प्रश्न पूछा है। अब मैं परब्रह्म परमेश्वर, उनकी आद्यशक्ति, तथा ज्ञान की अधिष्ठात्री भगवती सरस्वती को प्रणाम करके...
Coordinate Origin Definition: Invariant Barycentric Reference Frame (ICRF/IAU).
सूर्य नत्वा ग्रहपतिं जगदुत्पत्तिकारणम् । वक्ष्यामि वेदनयनं यथा ब्रह्ममुखाच्छ्रुतम् ॥ ६॥
ग्रहपतिं जगदुत्पत्तिकारणं सूर्यं नत्वा ब्रह्ममुखात् यथा श्रुतं तथा वेदनयनं वक्ष्यामि।
समस्त ग्रहों के अधिपति, सम्पूर्ण जगत की उत्पत्ति व जीवन के मुख्य कारण भगवान सूर्यनारायण को नमन करके, जैसा मैंने ब्रह्मा जी के मुख से सुना था, उस वेदों के नेत्र स्वरूप होरा शास्त्र का वर्णन करता हूँ।
Solar Center Vector: S_sun = [X, Y, Z] via Newcomb / VSOP87 analytical series. Obliquity ε = 23°26'21.448" - 46.815"·T.
शान्ताय गुरुभक्ताय सर्वदा सत्यवादिने । आस्तिकाय प्रदातव्यं ततः श्रेयो ह्यवाप्स्यति ॥ ७॥
शान्ताय गुरुभक्ताय सर्वदा सत्यवादिने आस्तिकाय (इदं शास्त्रं) प्रदातव्यं ततः श्रेयो ह्यवाप्स्यति।
यह परम पावन विद्या केवल उसी को देनी चाहिए जो शांत चित्त वाला हो, गुरु के चरणों में अनन्य भक्ति रखता हो, सदा सत्य बोलता हो और ईश्वर व धर्म में पूर्ण आस्थावान हो। ऐसे सुपात्र को यह ज्ञान देने से परम श्रेय और कल्याण प्राप्त होता है।
Integrity Check: Zero-Error Boundary Conditions | Shastra Moral Coefficient = +1.0.
न देयं परशिष्याय नास्तिकाय शठाय वा । दत्ते प्रतिदिनं दुःखं जायते नात्र संशयः ॥ ८॥
परशिष्याय नास्तिकाय शठाय वा न देयं, दत्ते सति प्रतिदिनं दुःखं जायते अत्र संशयः न।
जो व्यक्ति दूसरे का अनधिकृत शिष्य हो, नास्तिक हो अथवा कपटी व धूर्त स्वभाव का हो, उसे यह गूढ़ विद्या कदापि नहीं देनी चाहिए। कुपात्र को यह ज्ञान देने से प्रतिदिन क्लेश और अमंगल उत्पन्न होता है, इसमें कोई संशय नहीं है।
Security Cryptographic Token: Access_Granted = (Devotion == True && Integrity == True).
एकोऽव्यक्तात्मको विष्णुरनादिः प्रभुरीश्वरः । शुद्धसत्वो जगत्स्वामी निर्गुणस्त्रिगुणान्वितः ॥ ९॥
एकः अव्यक्तात्मकः विष्णुः अनादिः प्रभुः ईश्वरः शुद्धसत्त्वः जगत्स्वामी निर्गुणः त्रिगुणान्वितः।
सृष्टि के मूल कारण भगवान विष्णु हैं, जो एक, अव्यक्त, अनादि, सर्वसमर्थ ईश्वर हैं। वे शुद्ध सत्वमय, जगत के स्वामी, मूलतः निर्गुण होकर भी सृष्टि रचना हेतु सत्व, रज और तम तीनों गुणों से युक्त होते हैं।
Primordial Singularity: Energy Tensor T_μν at t = 0. State Vector |Ψ⟩ = α|Sattva⟩ + β|Rajas⟩ + γ|Tamas⟩.
संसारकारकः श्रीमान्निमित्तात्मा प्रतापवान् । एकांशेन जगत्सर्व सृजत्यवति लीलया ॥ १०॥
संसारकारकः श्रीमान् निमित्तात्मा प्रतापवान् एकांशेन लीलया सर्वं जगत् सृजति अवति च।
वे परम ऐश्वर्यशाली, तेजस्वी और संसार के परम निमित्त प्रभु अपने केवल एक सूक्ष्म अंश से लीला मात्र से इस समस्त ब्रह्मांड का सृजन और पालन करते हैं।
Cosmic Expansion Factor: a(t) where H^2 = (8πG/3)ρ - k/a^2 + Λ/3.
त्रिपादं तस्य देवस्य ह्यमृतं तत्त्वदर्शिनः । विदन्ति तत्प्रमाणं च सप्रधानं तथैकपात् ॥ ११॥
तस्य देवस्य त्रिपादं ह्यमृतं तत्त्वदर्शिनः विदन्ति, सप्रधानं एकपात् तथैव च तत्प्रमाणम्।
तत्त्वदर्शी ज्ञानी पुरुष जानते हैं कि उस परम पुरुष का तीन-चौथाई (त्रिपाद) स्वरूप अमर व नित्य दिव्य धाम में स्थित है, और केवल एक पाद (एक चौथाई अंश) ही इस दृश्य प्रकृति व ब्रह्मांड के रूप में व्यक्त होता है।
Quantum Dimension Ratio: Dark Energy & Subtle Reality (75%) : Observable Matter (25%).
व्यक्ताव्यक्तात्मको विष्णुर्वासुदेवस्तु गीयते । यदव्यक्तात्मको विष्णुः शक्तितद्वयसमन्वितः ॥ १२॥
व्यक्ताव्यक्तात्मकः विष्णुः वासुदेवः तु गीयते, यत् अव्यक्तात्मकः विष्णुः शक्तित्वयसमन्वितः।
व्यक्त और अव्यक्त दोनों रूपों में व्याप्त भगवान विष्णु को 'वासुदेव' कहा जाता है। जब वे अव्यक्त रहते हैं, तब अपनी परा-शक्तियों के साथ संयुक्त रहते हैं।
Field Duality: Continuous Wave Function Ψ(x,t) ⊗ Discrete Particle Inhabitation.
व्यक्तात्मकस्त्रिभिर्युक्तः कथ्यतेऽनन्तशक्तिमान् । सत्त्वप्रधाना श्रीशक्तिर्भूशक्तिश्च रजोगुणा ॥ १३॥
व्यक्तात्मकः त्रिभिः युक्तः अनन्तशक्तिमान् कथ्यते, सत्त्वप्रधाना श्रीशक्तिः भूशक्तिः च रजोगुणा।
सृष्टि में व्यक्त होने पर वे अनन्त शक्तिमान वासुदेव तीन महा-शक्तियों से युक्त होते हैं: सत्व गुण प्रधान 'श्री शक्ति' (लक्ष्मी/पालन), और रजोगुण प्रधान 'भू शक्ति' (सरस्वती/सृजन)।
Primary Eigenvalues: λ1(Sattva) = Preservation, λ2(Rajas) = Creation.
शक्तिस्तृतीया या प्राक्ता नीलाख्या ध्वान्तरूपिणी । वासुदेवश्चतुर्थोऽभूच्छ्रीशक्त्या प्रेरितो यदा ॥ १४॥
तृतीया शक्तिः या प्राक्ता सा नीलाख्या ध्वान्तरूपिणी, वासुदेवः चतुर्थः अभूत् यदा श्रीशक्त्या प्रेरितः।
तीसरी शक्ति तमोगुण स्वरूप 'नीला शक्ति' (काली/संहार/अज्ञान-निवारण) कहलाती है। जब वासुदेव श्री शक्ति से प्रेरित होते हैं, तब वे चतुर्व्यूह रूप धारण करते हैं।
Tri-Force Decomposition: F_total = F_sri + F_bhu + F_nila.
सङ्कर्षणश्च प्रद्युम्नोऽनिरुद्ध इति मूर्तिधृक् । तमःशक्त्याऽन्विता विष्णुर्देवः सङ्कर्षणाभिधः ॥ १५॥
सङ्कर्षणः प्रद्युम्नः अनिरुद्धः इति मूर्तिधृक्, तमःशक्त्या अन्वितः विष्णुः सङ्कर्षणाभिधः देवः।
भगवान वासुदेव संकर्षण, प्रद्युम्न और अनिरुद्ध नाम से तीन प्रमुख मूर्तियां धारण करते हैं। तमोगुण शक्ति से संयुक्त होकर वे 'संकर्षण' कहलाते हैं।
Gravitational Inflow Vector: Sankarshana (Centripetal Attraction / Inward Collapse).
प्रद्युम्नो रजसा शक्त्याऽनिरुद्धः सत्त्वया युतः । महान् सङ्कर्षणाज्जातः प्रद्युम्नाद्यदहङ्कृतिः ॥ १६॥
प्रद्युम्नः रजसा शक्त्या, अनिरुद्धः सत्त्वया युतः। सङ्कर्षणात् महान् जातः, प्रद्युम्नात् यत् अहङ्कृतिः।
प्रद्युम्न रजोगुण शक्ति से और अनिरुद्ध सत्वगुण शक्ति से युक्त होते हैं। संकर्षण से महत्तत्व (बुद्धि) उत्पन्न हुआ, और प्रद्युम्न से अहंकार की उत्पत्ति हुई।
Cosmological Inflation: Mahat (Cosmic Intelligence Matrix) -> Ahamkara (Spacetime Grid).
अनिरुद्धात् स्वयं जातो ब्रह्माहङ्काकमूर्तिधृक् । सर्वेषु सर्वशक्तिश्च स्वशक्त्याऽधिकया युतः ॥ १७॥
अनिरुद्धात् अहङ्कारमूर्तिधृक् ब्रह्मा स्वयं जातः, सर्वेषु सर्वशक्तिः च स्वशक्त्या अधिकया युतः।
अनिरुद्ध से अहंकार की मूर्ति धारण करने वाले ब्रह्मा जी प्रकट हुए, जो संपूर्ण जीवों में सृजन की शक्ति का संचार करते हैं।
Biological Genesis Function: Cell Division & Genetic Encoding Operator.
अहङ्कारस्त्रिध भूत्वा सर्वमेतद्विस्तरात् । सात्त्विको राजसश्चैव तामसश्चेदहङ्कृतिः ॥ १८॥
अहङ्कारः त्रिधा भूत्वा सर्वम् एतत् विस्तरात्—सात्त्विकः, राजसः च एव तामसः च इति अहङ्कृतिः।
वह अहंकार तीन भागों में विभक्त हुआ—सात्त्विक (वैकारिक), राजसिक (तैजस), और तामसिक (भूतादि)। इसी से सम्पूर्ण दृश्य जगत का विस्तार हुआ।
Tri-Phase State Space Matrix: [S; R; T].
देवा वैकारिकाज्जातास्तैजसादिन्द्रियाणि च । तामसच्चैवभू तानि खादीनि स्वस्वशक्तिभिः ॥ १९॥
वैकारिकात् देवाः जाताः, तैजसात् इन्द्रियाणि च, तामसात् च एव भूतानि खादीनि स्वस्वशक्तिभिः।
सात्त्विक अहंकार से दिशा, सूर्य, वरुण आदि देवता प्रकट हुए; राजसिक अहंकार से दसों इन्द्रियां और मन उत्पन्न हुए; तथा तामसिक अहंकार से पंचतन्मात्राएं और आकाश, वायु, अग्नि, जल व पृथ्वी पंचमहाभूत उत्पन्न हुए।
Sensory & Physical Continuum: 5 Elements (Ether, Air, Fire, Water, Earth) ⊗ 5 Tanmatras.
श्रीशक्त्या सहितो विष्णुः सदा पाति जगत्त्रयम् । भूशक्त्या सृजते ब्रह्मा नीलशक्त्या शिवोऽत्ति हि ॥ २०॥
विष्णुः श्रीशक्त्या सहितः सदा जगत्त्रयं पाति, ब्रह्मा भूशक्त्या सृजते, शिवः नीलशक्त्या अत्ति हि।
भगवान विष्णु श्री शक्ति के साथ तीनों लोकों का निरंतर पालन-पोषण करते हैं; ब्रह्मा जी भू शक्ति से सृष्टि का सृजन करते हैं; और भगवान शिव नीला शक्ति से प्रलय काल में समस्त जगत का संहार करते हैं।
Cyclic Universal Entropy: dS/dt Equilibrium across Cosmic Kalpas.
सर्वेषु चैव जीवेषु परमात्मा विराजते । सर्वं हि तदिदं ब्रह्मन् स्थितं हि परमात्मनि ॥ २१॥
सर्वेषु चैव जीवेषु परमात्मा विराजते, ब्रह्मन्! इदं सर्वं तद् हि परमात्मनि स्थितम्।
महर्षि पराशर कहते हैं: हे विप्र! इस संसार के सभी कीट-पतंग से लेकर मनुष्य व देवताओं तक सभी जीवों में वही परमात्मा अंतर्यामी रूप से विराजमान हैं, और यह सम्पूर्ण ब्रह्मांड उन्हीं में प्रतिष्ठित है।
Omnipresence Field Tensor: G_ab + Λ·g_ab = 8πG·T_ab.
सर्वेषु चैव जीवेषु स्थितंह्यंशद्वयं क्वचित् । जीवांशो ह्यधिकस्तद्वत् परमात्मांशकः किल ॥ २२॥
सर्वेषु चैव जीवेषु क्वचित् अंशद्वयं स्थितम्—जीवांशः हि अधिकः, तद्वत् परमात्मांशकः किल।
समस्त जीवों में दो प्रकार के अंश होते हैं: जीवांश और परमात्मांश। सामान्य जीवों में जीवांश अधिक होता है और परमात्मांश अल्प रहता है।
Soul Coefficient: Ratio R_jiva = Jiva_Amsha / (Jiva_Amsha + Paramatma_Amsha).
सूर्यादयो ग्रहाः सर्वे ब्रह्मकामद्विषादयः । एते चान्ये च बहवः परमात्मांशकाधिकाः ॥ २३॥
सूर्यादयः सर्वे ग्रहाः, ब्रह्म-कामद्विषादयः (शिवादयः), एते च अन्ये च बहवः परमात्मांशकाधिकाः।
सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि आदि सभी नवग्रह, तथा ब्रह्मा और महादेव आदि देवगण—इन सभी में परमात्मा का अंश (परमात्मांश) सर्वाधिक होता है! इसी कारण ग्रह साक्षात परमेश्वर के अवतार रूप हैं!
Planetary Divine Potency: Paramatma_Weight(Sun..Saturn) > 0.95. Ephemeris planetary forces carry direct karmic authority.
शक्तयश्च तथैतेषामधिकांशाः श्रियादयः । स्वस्वशक्तिषु चान्यासु ज्ञेया जीवांशकाधिकाः ॥ २४॥
शक्तयः च तथा एतेषाम् श्रियादयः अधिकांशाः, स्वस्वशक्तिषु च अन्यासु जीवांशकाधिकाः ज्ञेयाः।
उसी प्रकार लक्ष्मी आदि प्रमुख देवियों में परमात्मा की परा-शक्ति का अंश प्रधान होता है, जबकि अन्य साधारण शक्तियों में जीवांश की अधिकता होती है। इस प्रकार सृष्टिक्रम का यह रहस्य पूर्ण होता है।
Srishti Krama Completion: Normalization Constant ∮ P(E) dE = 1.0. End of Chapter 1 Canon.