दशा व गणित

षष्ट्यंश (D60) — बृहत्पाराशर होराशास्त्र का सूत्र, 60 देवता और जन्म समय की सावधानी

लेखक: एस्ट्रो रामजी (Astro Raamji) · · 3 मिनट पढ़ें

षष्ट्यंश कुंडली (D60)

संक्षेप में

षष्ट्यंश (D60) में हर राशि को 30′ (आधा अंश) के 60 भागों में बाँटा जाता है। बृहत्पाराशर होराशास्त्र (6.33) के अनुसार ग्रह के अंशों को दो से गुणा कर 12 से भाग दें, शेष में एक जोड़ें — ग्रह की राशि से उतनी गिनती पर षष्ट्यंश राशि आती है। पराशर (6.41) कहते हैं कि शुभ षष्ट्यंश में ग्रह शुभ फल देते हैं और क्रूर षष्ट्यंश में फल का नाश करते हैं। D60 लग्न लगभग हर 2 मिनट में बदलता है।

षष्ट्यंश क्या है?

षष्ट्यंश यानी राशि का साठवाँ भाग — पराशर के सोलह वर्गों में सबसे सूक्ष्म। पराशर कहते हैं कि अक्षवेदांश और षष्ट्यंश में "सब कुछ" देखें:

अक्षवेदांशके चैव षष्ट्यंशेऽखिलमीक्षयेत् ।
यत्र कुत्रापि सम्प्राप्तः क्रूरषष्ट्यंशकाधिपः ॥ ६॥
बृहत्पाराशर होराशास्त्र · अध्याय 7 (वर्गविवेकाध्यायः) · श्लोक 6
तत्र नाशो न सन्दे हो गर्गादीनां वचो यथा ।
यत्र कुत्रापि सम्प्राप्तः कलांशाधिपतिः शुभः ॥ ७॥
बृहत्पाराशर होराशास्त्र · अध्याय 7 (वर्गविवेकाध्यायः) · श्लोक 7

अर्थ: अक्षवेदांश और षष्ट्यंश से सब कुछ देखें। जहाँ कहीं भी क्रूर षष्ट्यंश का स्वामी पहुँचे, वहाँ नाश होता है — ऐसा गर्ग आदि का वचन है। और जहाँ कहीं शुभ कलांश का स्वामी पहुँचे, वहाँ वृद्धि और पुष्टि होती है (7.8)।

परंपरा में D60 को पूर्व जन्म के कर्मों से जोड़ा जाता है। यह व्याख्या बाद की परंपरा की है; पराशर के शब्दों में यह "सब कुछ देखने" का वर्ग है।

गणना का सूत्र

राशीन् विहाय खेटस्य द्विघ्नमंशाद्यमर्कहृत् ।
शेषं सैकं तद्राशेर्भपाः षष्ट्यंशपाः स्मृताः ॥ ३३॥
बृहत्पाराशर होराशास्त्र · अध्याय 6 (षोडशवर्गाध्यायः) · श्लोक 33

अर्थ: ग्रह की राशि छोड़कर केवल अंश-कला लें, उन्हें दो से गुणा करें और 12 से भाग दें। शेष में एक जोड़ें — ग्रह की राशि से उतनी गिनती पर षष्ट्यंश राशि होती है।

  • हर षष्ट्यंश = 30° ÷ 60 = 30′ (आधा अंश)।
  • सरल नियम: अंशों को 2 से गुणा करें — पूर्णांक भाग + 1 = षष्ट्यंश क्रमांक (1 से 60)।

उदाहरण

मान लीजिए शनि तुला 7°20′ पर है।

  • 7°20′ × 2 = 14°40′ → पूर्णांक 14, यानी यह 15वाँ षष्ट्यंश है।
  • 14 को 12 से भाग देने पर शेष 2; उसमें 1 जोड़ें = 3।
  • तुला से तीसरी राशि: तुला (1), वृश्चिक (2), धनु (3) — षष्ट्यंश राशि धनु।

60 षष्ट्यंश देवता

पराशर (6.34–39) ने साठों षष्ट्यंशों के नाम दिए हैं। विषम राशि में क्रम घोर, राक्षस, देव, कुबेर, यक्ष, किन्नर, भ्रष्ट, कुलघ्न, गरल, वह्नि, माया, पुरीषक, अपाम्पति, मरुत्वान्, काल... से शुरू होकर चंद्ररेखा पर समाप्त होता है, और सम राशि में यही क्रम उलटा चलता है:

समे भे व्यत्ययाज्ज्ञेयाः षष्ट्यंशेशाः प्रकीर्तिताः ।
षष्ट्यांशस्वामिनस्त्वोजे तदीशादव्यत्पयः समे ॥ ४०॥
बृहत्पाराशर होराशास्त्र · अध्याय 6 (षोडशवर्गाध्यायः) · श्लोक 40
शुभषष्टयंशसंयुक्ता ग्रहाः शुभफलप्रदाः ।
क्रूरषष्ट्यंशसंयुक्ता नाशयन्ति खचारिणः ॥ ४१॥
बृहत्पाराशर होराशास्त्र · अध्याय 6 (षोडशवर्गाध्यायः) · श्लोक 41

अर्थ: सम राशि में षष्ट्यंशेश उलटे क्रम से जानें। शुभ षष्ट्यंश में स्थित ग्रह शुभ फल देते हैं और क्रूर षष्ट्यंश में स्थित ग्रह फल का नाश करते हैं।

ऊपर के उदाहरण में तुला विषम राशि है, इसलिए 15वाँ षष्ट्यंश "काल" होगा।

सबसे बड़ी सावधानी: जन्म समय

  • एक षष्ट्यंश केवल आधा अंश है। लग्न औसतन 4 मिनट में एक अंश चलता है, इसलिए D60 लग्न लगभग हर 2 मिनट में बदलता है।
  • अस्पताल में दर्ज समय में भी प्रायः 2–5 मिनट का अंतर होता है। इसलिए बिना जन्म समय शुद्धि के D60 लग्न पर निर्णय देना उचित नहीं।
  • ग्रहों के लिए D60 अधिक स्थिर है — चंद्रमा को छोड़कर बाकी ग्रह आधा अंश धीरे-धीरे पार करते हैं।
  • सटीक D60 के लिए सटीक ग्रह-स्पष्ट और सही अयनांश भी उतने ही ज़रूरी हैं; कुछ कला का अंतर भी षष्ट्यंश बदल सकता है।

हमारी मुफ़्त जन्म पत्रिका में सोलहों वर्ग, D60 सहित, सटीक ग्रह-स्पष्ट से बनते हैं।

पूछे जाने वाले प्रश्न

षष्ट्यंश (D60) कैसे निकालते हैं?

ग्रह के अंशों को 2 से गुणा करें, 12 से भाग देकर शेष में 1 जोड़ें — ग्रह की राशि से उतनी गिनती पर षष्ट्यंश राशि होती है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र 6.33)।

D60 से क्या देखा जाता है?

पराशर (7.6) कहते हैं कि षष्ट्यंश से "सब कुछ" देखें। शुभ षष्ट्यंश में ग्रह शुभ फल और क्रूर षष्ट्यंश में फल-नाश करते हैं (6.41)।

D60 लग्न कितनी देर में बदलता है?

लगभग हर 2 मिनट में, इसलिए बिना जन्म समय शुद्धि के D60 लग्न पर निर्णय नहीं देना चाहिए।

क्या D60 पूर्व जन्म के कर्म बताता है?

यह परंपरा की व्याख्या है। पराशर के शब्दों में यह सबसे सूक्ष्म वर्ग है जिससे सब कुछ देखा जाता है।