पुष्कर नवांश — हर राशि के दो शुभ नवांश, उनका तर्क और सही उपयोग
संक्षेप में
पुष्कर नवांश हर राशि के वे दो नवांश हैं जिनके स्वामी शुभ ग्रह (गुरु, शुक्र, चंद्र, बुध) हैं — अग्नि राशियों में 7वाँ और 9वाँ, पृथ्वी राशियों में 3रा और 5वाँ, वायु राशियों में 6ठा और 8वाँ, और जल राशियों में 1ला और 3रा नवांश। परंपरा में माना जाता है कि पुष्कर नवांश में बैठा ग्रह, निर्बल होने पर भी, शुभ फल देने की क्षमता पाता है। यह नियम बाद के ग्रंथों का है; बृहत्पाराशर होराशास्त्र में इस नाम से नहीं है।
पुष्कर नवांश क्या है?
"पुष्कर" का अर्थ है पोषण करने वाला। हर राशि के नौ नवांशों में से दो नवांश ऐसे माने जाते हैं जो ग्रह को पोषण देते हैं — इन्हें पुष्कर नवांश कहते हैं। परंपरा में माना जाता है कि कमज़ोर या पीड़ित ग्रह भी पुष्कर नवांश में हो तो शुभ फल देने की क्षमता पाता है।
स्रोत: यह नियम बाद के ग्रंथों और परंपरा का है। बृहत्पाराशर होराशास्त्र में "पुष्कर" नाम से यह नहीं मिलता, पर नवांश की गणना पराशर का ही सूत्र है:
नवांशेशाश्चरे तस्मात्स्थिरे तन्नवमादितः ।
उभये तत्पञ्चमादेरिति चिन्त्यं विचक्षणैः ।
देवा नृराक्षसाश्चैव चरादिषु गृहेषु च ॥ १२॥अर्थ: चर राशि में नवांश उसी राशि से, स्थिर राशि में उससे नवम राशि से, और द्विस्वभाव राशि में उससे पंचम राशि से गिने जाते हैं।
पुष्कर नवांश की सूची
- अग्नि राशियाँ (मेष, सिंह, धनु): 7वाँ और 9वाँ नवांश।
- पृथ्वी राशियाँ (वृष, कन्या, मकर): 3रा और 5वाँ नवांश।
- वायु राशियाँ (मिथुन, तुला, कुंभ): 6ठा और 8वाँ नवांश।
- जल राशियाँ (कर्क, वृश्चिक, मीन): 1ला और 3रा नवांश।
यह सूची कहाँ से आती है? — सरल तर्क
पराशर के सूत्र (6.12) से हर तत्व की राशियों के नवांश एक ही राशि से शुरू होते हैं: अग्नि के मेष से, पृथ्वी के मकर से, वायु के तुला से, और जल के कर्क से। अब देखें कि पुष्कर नवांश किन राशियों के हैं:
- अग्नि (मेष से): 7वाँ = तुला (शुक्र), 9वाँ = धनु (गुरु)।
- पृथ्वी (मकर से): 3रा = मीन (गुरु), 5वाँ = वृष (शुक्र)।
- वायु (तुला से): 6ठा = मीन (गुरु), 8वाँ = वृष (शुक्र)।
- जल (कर्क से): 1ला = कर्क (चंद्र), 3रा = कन्या (बुध)।
यानी पुष्कर नवांश वे नवांश हैं जिनके स्वामी शुभ ग्रह — गुरु, शुक्र, चंद्र और बुध — हैं। यह तर्क सूची को याद रखना आसान बना देता है।
अंशों में
हर नवांश 3°20′ का है। उदाहरण:
- मेष (अग्नि): 7वाँ नवांश 20°00′–23°20′, 9वाँ 26°40′–30°00′।
- वृष (पृथ्वी): 3रा 6°40′–10°00′, 5वाँ 13°20′–16°40′।
पुष्कर भाग
परंपरा में हर राशि का एक विशेष अंश भी "पुष्कर भाग" कहलाता है, जो सबसे शुभ माना जाता है। इसकी सूचियों में ग्रंथों के बीच अंतर मिलता है, इसलिए इसे प्रमाण के रूप में उपयोग करने से पहले स्रोत जाँच लें।
उपयोग में सावधानी
- पुष्कर नवांश ग्रह का सहायक बल है — यह नीच ग्रह को उच्च नहीं बनाता।
- ग्रह का मुख्य बल षड्बल, भाव और दृष्टि से तय होता है — हमारा लेख षड्बल देखें।
- मुहूर्त में लग्न को पुष्कर नवांश में रखना परंपरा में शुभ माना जाता है।
नवांश की पूरी गणना हमारे लेख नवांश कुंडली (D9) में है। अपने ग्रहों के नवांश मुफ़्त जन्म पत्रिका में देखें।
पूछे जाने वाले प्रश्न
पुष्कर नवांश कौन से हैं?
अग्नि राशियों में 7वाँ और 9वाँ, पृथ्वी में 3रा और 5वाँ, वायु में 6ठा और 8वाँ, और जल राशियों में 1ला और 3रा नवांश।
पुष्कर नवांश शुभ क्यों हैं?
क्योंकि इन नवांशों के स्वामी शुभ ग्रह — गुरु, शुक्र, चंद्र और बुध — हैं।
क्या पुष्कर नवांश बृहत्पाराशर होराशास्त्र में है?
इस नाम से नहीं; यह बाद की परंपरा का नियम है। नवांश की गणना पराशर के सूत्र (6.12) से ही होती है।
क्या पुष्कर नवांश नीच ग्रह को बलवान बना देता है?
नहीं, यह सहायक बल है। ग्रह का मुख्य बल षड्बल, भाव और दृष्टि से तय होता है।