नींव पूजन (भूमि पूजन) मुहूर्त — शुभ नक्षत्र, तिथि, वार और ध्यान रखने योग्य बातें
संक्षेप में
नींव पूजन (गृह आरंभ) के लिए मुहूर्त परंपरा में स्थिर (ध्रुव) नक्षत्र — रोहिणी, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद — और मृदु नक्षत्र — मृगशिरा, चित्रा, अनुराधा, रेवती — शुभ माने जाते हैं, क्योंकि घर स्थायी होना चाहिए। रिक्ता तिथियाँ (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी), अमावस्या, गुरु या शुक्र अस्त, और चंद्राष्टम से बचा जाता है, और स्थिर लग्न (वृष, सिंह, वृश्चिक, कुंभ) को प्राथमिकता दी जाती है। ये नियम मुहूर्त और वास्तु ग्रंथों के हैं, बृहत्पाराशर होराशास्त्र के नहीं।
नींव पूजन का मुहूर्त क्यों?
घर कई पीढ़ियों तक रहने के लिए बनाया जाता है, इसलिए उसकी शुरुआत ऐसे समय में की जाती है जो स्थिरता का प्रतीक हो। मुहूर्त चिंतामणि जैसे मुहूर्त ग्रंथों के वास्तु प्रकरण और वास्तु शास्त्र में इसके नियम मिलते हैं।
स्रोत: ये नियम मुहूर्त और वास्तु ग्रंथों के हैं; बृहत्पाराशर होराशास्त्र जन्म-कुंडली का ग्रंथ है और उसमें गृहारंभ मुहूर्त का अध्याय नहीं है। ग्रंथों और क्षेत्रीय परंपराओं में कुछ अंतर भी मिलते हैं, इसलिए स्थानीय पंचांग और योग्य आचार्य से अंतिम मुहूर्त लें।
शुभ नक्षत्र
- स्थिर (ध्रुव) नक्षत्र: रोहिणी, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद — स्थायित्व के लिए सबसे उपयुक्त।
- मृदु नक्षत्र: मृगशिरा, चित्रा, अनुराधा, रेवती।
- कई परंपराएँ पुष्य, हस्त, स्वाती, धनिष्ठा और शतभिषा को भी लेती हैं।
तिथि और वार
- शुभ तिथियाँ: परंपरा में द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, त्रयोदशी और पूर्णिमा।
- वर्जित: रिक्ता तिथियाँ (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) और अमावस्या।
- वार: सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार प्रायः शुभ; मंगलवार और रविवार परंपरा में टाले जाते हैं (कुछ परंपराओं में शनिवार स्थिर कार्यों के लिए स्वीकार्य)।
लग्न
- स्थिर लग्न (वृष, सिंह, वृश्चिक, कुंभ) को प्राथमिकता — स्थायित्व के लिए।
- लग्न पर शुभ ग्रहों की दृष्टि हो, और आठवाँ भाव खाली हो।
- लग्न को पुष्कर नवांश में रखना परंपरा में अतिरिक्त शुभ माना जाता है — हमारा लेख पुष्कर नवांश देखें।
किन समयों से बचें
- गुरु या शुक्र अस्त — विवरण हमारे लेख शुक्र अस्त में।
- अधिक मास (मलमास) और परंपरा में खरमास — लेख संक्रांति, खरमास, मलमास।
- गृह स्वामी का चंद्राष्टम — लेख चंद्राष्टम।
- राहु काल, और ग्रहण के आसपास के दिन।
गृह स्वामी की कुंडली
सामान्य मुहूर्त के साथ गृह स्वामी की कुंडली भी देखी जाती है — चौथा भाव (घर, भूमि), चतुर्थेश, मंगल (भूमि का कारक) और चल रही दशा। पराशर कहते हैं कि मंगल के अष्टकवर्ग में अधिक अंक वाली राशि में मंगल के गोचर से भूमि-लाभ होता है:
त्रिकोणशोधनं कृत्वा यत्र स्यादधिकं फलम् ।
भूमेर्लाभोऽत्र भार्याया भ्रातृणां सुखमुत्तमम् ॥ २५॥अर्थ: त्रिकोण-शोधन के बाद जिस राशि में अधिक अंक हों, (वहाँ मंगल के गोचर में) भूमि का लाभ, पत्नी का सुख और भाइयों का उत्तम सुख होता है।
भूमि पूजन की सामान्य विधि
- भूमि की शुद्धि, गणेश पूजन और संकल्प।
- वास्तु पुरुष, भूमि देवी और दिक्पालों की पूजा।
- परंपरा में ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) से खुदाई की शुरुआत।
- नींव में कलश, पंचरत्न या चाँदी के नाग-नागिन रखने की क्षेत्रीय परंपराएँ।
- ब्राह्मण और कारीगरों का सम्मान।
अपनी कुंडली का चौथा भाव और दशा मुफ़्त जन्म पत्रिका में देखें, और सटीक मुहूर्त के लिए व्यक्तिगत परामर्श लें।
पूछे जाने वाले प्रश्न
नींव पूजन के लिए कौन से नक्षत्र शुभ हैं?
परंपरा में स्थिर नक्षत्र — रोहिणी, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद — और मृदु नक्षत्र — मृगशिरा, चित्रा, अनुराधा, रेवती।
नींव पूजन में कौन सी तिथियाँ वर्जित हैं?
रिक्ता तिथियाँ (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) और अमावस्या।
नींव पूजन के लिए कौन सा लग्न अच्छा है?
स्थिर लग्न — वृष, सिंह, वृश्चिक या कुंभ — जिस पर शुभ दृष्टि हो और आठवाँ भाव खाली हो।
क्या गृहारंभ मुहूर्त बृहत्पाराशर होराशास्त्र में है?
नहीं। ये नियम मुहूर्त और वास्तु ग्रंथों के हैं। बृहत्पाराशर होराशास्त्र जन्म-कुंडली का ग्रंथ है।