विवाह

नवांश कुंडली (D9) — बृहत्पाराशर होराशास्त्र का सूत्र, उदाहरण और विवाह में उपयोग

लेखक: एस्ट्रो रामजी (Astro Raamji) · · 3 मिनट पढ़ें

नवांश कुंडली (D9)

संक्षेप में

नवांश (D9) में हर राशि के 30° को 3°20′ के नौ भागों में बाँटा जाता है। बृहत्पाराशर होराशास्त्र (6.12) के अनुसार चर राशि (मेष, कर्क, तुला, मकर) में नवांश उसी राशि से, स्थिर राशि (वृष, सिंह, वृश्चिक, कुंभ) में उससे नवम राशि से, और द्विस्वभाव राशि (मिथुन, कन्या, धनु, मीन) में उससे पंचम राशि से गिने जाते हैं। पराशर (7.3) कहते हैं कि नवांश से जीवनसाथी का विचार करें।

नवांश क्या है?

"नवांश" का अर्थ है नौवाँ भाग। पराशर ने षोडशवर्गाध्याय (अध्याय 6) में सोलह वर्ग चार्ट बताए हैं, और उनमें नवांश सबसे अधिक उपयोग होने वाला वर्ग है:

क्षेत्रं होरा च द्रेष्काणस्तुर्यांशः सप्तमांशकः ।
नवांशो दशमांशश्च सूर्याम्शः षोडशांशकः ॥ ३॥
बृहत्पाराशर होराशास्त्र · अध्याय 6 (षोडशवर्गाध्यायः) · श्लोक 3

हर राशि 30° की होती है। उसे नौ बराबर भागों में बाँटें तो हर भाग 3°20′ का होता है — यही एक नवांश है। 12 राशियों × 9 = 108 नवांश।

नवांश से क्या देखा जाता है?

नवमांशे कलत्राणां दशमांशे महत्फलम् ।
द्वादशांशे तथा पित्रोश्चिन्तनं षोडशांशके ॥ ३॥
बृहत्पाराशर होराशास्त्र · अध्याय 7 (वर्गविवेकाध्यायः) · श्लोक 3

अर्थ: नवांश से जीवनसाथी (कलत्र) का विचार करें, और दशमांश से बड़े फल (कर्म, पद) का।

परंपरा में नवांश को ग्रहों का वास्तविक बल देखने के लिए भी उपयोग किया जाता है — "D1 शरीर है, D9 आत्मा" यह कहावत इसी विचार से आई है। कोई ग्रह जन्म कुंडली में उच्च हो पर नवांश में नीच, तो उसका फल कमज़ोर माना जाता है।

गणना का सूत्र

नवांशेशाश्चरे तस्मात्स्थिरे तन्नवमादितः ।
उभये तत्पञ्चमादेरिति चिन्त्यं विचक्षणैः ।
देवा नृराक्षसाश्चैव चरादिषु गृहेषु च ॥ १२॥
बृहत्पाराशर होराशास्त्र · अध्याय 6 (षोडशवर्गाध्यायः) · श्लोक 12

अर्थ: चर राशि में नवांश उसी राशि से शुरू होते हैं, स्थिर राशि में उससे नवम राशि से, और द्विस्वभाव (उभय) राशि में उससे पंचम राशि से।

  • चर राशियाँ (मेष, कर्क, तुला, मकर): पहला नवांश उसी राशि का।
  • स्थिर राशियाँ (वृष, सिंह, वृश्चिक, कुंभ): पहला नवांश उससे नौवीं राशि का।
  • द्विस्वभाव राशियाँ (मिथुन, कन्या, धनु, मीन): पहला नवांश उससे पाँचवीं राशि का।

इसका एक सरल परिणाम यह है कि मेष, सिंह और धनु का पहला नवांश मेष होता है — यानी अग्नि तत्व की राशियाँ मेष से, पृथ्वी तत्व की मकर से, वायु की तुला से और जल की कर्क से शुरू होती हैं।

उदाहरण

मान लीजिए चंद्रमा वृष 15° पर है।

  • वृष स्थिर राशि है, इसलिए नवांश उससे नौवीं राशि मकर से शुरू होंगे।
  • 15° ÷ 3°20′ = 4.5, यानी चंद्रमा पाँचवें नवांश (13°20′ से 16°40′) में है।
  • मकर (1), कुंभ (2), मीन (3), मेष (4), वृष (5) — नवांश राशि वृष।
  • जन्म कुंडली और नवांश दोनों में वृष — यह चंद्रमा वर्गोत्तम है।

वर्गोत्तम ग्रह

जब कोई ग्रह जन्म कुंडली और नवांश में एक ही राशि में हो, तो उसे परंपरा में वर्गोत्तम कहा जाता है और बलवान माना जाता है। हर राशि में एक नवांश वर्गोत्तम होता है — चर राशि का पहला, स्थिर का पाँचवाँ और द्विस्वभाव का आखिरी।

सही जन्म समय क्यों ज़रूरी है?

लग्न लगभग दो घंटे में एक राशि पार करता है, इसलिए नवांश लग्न औसतन लगभग 13 मिनट में बदल जाता है। जन्म समय में 10–15 मिनट की गलती से नवांश लग्न बदल सकता है, और विवाह संबंधी निष्कर्ष भी। सटीक नवांश के लिए सही अयनांश और सटीक ग्रह-स्पष्ट भी उतने ही ज़रूरी हैं।

हमारी मुफ़्त जन्म पत्रिका में नवांश सहित सोलहों वर्ग चार्ट अपने आप बनते हैं।

पूछे जाने वाले प्रश्न

नवांश कुंडली कैसे बनती है?

हर राशि के 30° को 3°20′ के नौ भागों में बाँटते हैं। चर राशि में गिनती उसी राशि से, स्थिर में नौवीं से और द्विस्वभाव में पाँचवीं राशि से शुरू होती है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र 6.12)।

नवांश कुंडली से क्या देखा जाता है?

पराशर (7.3) के अनुसार मुख्यतः जीवनसाथी और विवाह। परंपरा में इससे ग्रहों का वास्तविक बल भी देखा जाता है।

वर्गोत्तम ग्रह क्या होता है?

जो ग्रह जन्म कुंडली और नवांश दोनों में एक ही राशि में हो। परंपरा में इसे बलवान माना जाता है।

नवांश लग्न कितनी देर में बदलता है?

औसतन लगभग 13 मिनट में, इसलिए नवांश के लिए सही जन्म समय बहुत ज़रूरी है।