विवाह

नाड़ी दोष — क्या है, कब बनता है और कब नहीं लगता

लेखक: एस्ट्रो रामजी (Astro Raamji) · · 3 मिनट पढ़ें

नाड़ी दोष

संक्षेप में

नाड़ी दोष अष्टकूट गुण मिलान का आठवाँ और सबसे भारी (8 अंक) कूट है। हर नक्षत्र आदि, मध्य या अंत्य — तीन में से एक नाड़ी का होता है। यदि वर और कन्या दोनों के जन्म नक्षत्र एक ही नाड़ी के हों, तो नाड़ी के 0 अंक मिलते हैं और इसे नाड़ी दोष कहते हैं। परंपरा में कुछ अपवाद माने जाते हैं, जैसे एक ही राशि पर अलग नक्षत्र, या एक ही नक्षत्र पर अलग राशि या चरण।

नाड़ी क्या है?

विवाह मिलान की अष्टकूट पद्धति (मुहूर्त ग्रंथों से) में 36 गुणों में से 8 गुण नाड़ी के होते हैं — सबसे अधिक। 27 नक्षत्रों को तीन नाड़ियों में बाँटा गया है, और यह क्रम 1-2-3-3-2-1 के झूले की तरह चलता है।

नक्षत्र और नाड़ी तालिका

  • आदि नाड़ी: अश्विनी, आर्द्रा, पुनर्वसु, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, ज्येष्ठा, मूल, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद
  • मध्य नाड़ी: भरणी, मृगशिरा, पुष्य, पूर्वा फाल्गुनी, चित्रा, अनुराधा, पूर्वाषाढ़ा, धनिष्ठा, उत्तरा भाद्रपद
  • अंत्य नाड़ी: कृत्तिका, रोहिणी, आश्लेषा, मघा, स्वाति, विशाखा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, रेवती

वर और कन्या की नाड़ी अलग हो तो 8 अंक, एक ही हो तो 0 अंक — यही नाड़ी दोष है।

परंपरा में नाड़ी दोष को इतना महत्व क्यों?

नाड़ी को आयुर्वेद के वात (आदि), पित्त (मध्य) और कफ (अंत्य) से जोड़ा जाता है, और परंपरा में माना जाता है कि एक ही नाड़ी होने से संतान और स्वास्थ्य संबंधी कठिनाई हो सकती है।

यहाँ एक ईमानदार बात कहना आवश्यक है: नाड़ी दोष को "ब्लड ग्रुप" या "जेनेटिक मिलान" से जोड़ने वाले दावे इंटरनेट पर बहुत मिलते हैं, पर इनका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। नाड़ी दोष एक शास्त्रीय-परंपरागत नियम है और इसे उसी रूप में समझना चाहिए। यदि स्वास्थ्य को लेकर चिंता हो, तो विवाह से पहले डॉक्टर की सलाह से चिकित्सीय जाँच करवाना समझदारी है।

परंपरा में मान्य अपवाद

मुहूर्त ग्रंथों और परंपरा में कुछ स्थितियों में नाड़ी दोष नहीं माना जाता:

  • एक ही राशि, अलग नक्षत्र: दोनों की चंद्र राशि एक हो पर जन्म नक्षत्र अलग हों।
  • एक ही नक्षत्र, अलग राशि: नक्षत्र एक हो पर चंद्र राशियाँ अलग हों (जैसे कृत्तिका, मृगशिरा, पुनर्वसु, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, विशाखा, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, पूर्वा भाद्रपद — जो दो राशियों में फैले हैं)।
  • एक ही नक्षत्र, अलग चरण: नक्षत्र एक हो पर चरण (पाद) अलग हों।
  • राशि-स्वामी एक या परस्पर मित्र हों: कई आचार्य इस स्थिति में भी दोष कम मानते हैं।

इन अपवादों का प्रयोग किसी अनुभवी ज्योतिषी से दोनों कुंडलियाँ दिखाकर ही करें, क्योंकि अलग-अलग परंपराएँ इन्हें अलग तरह से लागू करती हैं।

परिहार

परंपरा में नाड़ी दोष के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जप, स्वर्ण-नाड़ी या अन्न-दान और ब्राह्मण भोजन जैसे उपाय बताए जाते हैं।

केवल नाड़ी नहीं, पूरी कुंडली देखें

नाड़ी दोष केवल जन्म नक्षत्रों का मिलान है। विवाह-सुख के लिए महर्षि पराशर सातवें भाव और उसके स्वामी को मुख्य मानते हैं — सप्तमेश बलवान और शुभ ग्रहों से युक्त या दृष्ट हो तो जातक धनी, सम्मानित और सुखी होता है:

जायाधीशः शुभैर्युक्तो दृष्टो वा बलसंयुतः ।
तदा जातो धनी मानी सुखसौभाग्यसंयुतः ॥ ४॥
बृहत्पाराशर होराशास्त्र · अध्याय 18 (जायाभावफलाध्यायः) · श्लोक 4

इसलिए नाड़ी दोष मिलने पर तुरंत रिश्ता न तोड़ें — पहले देखें कि कोई अपवाद लागू होता है या नहीं, और दोनों कुंडलियों का सातवाँ भाव, मांगलिक स्थिति तथा दशाएँ कैसी हैं।

हमारे विवाह मिलान टूल में नाड़ी सहित पूरे 36 गुण अपने आप जाँचे जाते हैं।

पूछे जाने वाले प्रश्न

नाड़ी दोष क्या है?

जब वर और कन्या दोनों के जन्म नक्षत्र एक ही नाड़ी (आदि, मध्य या अंत्य) के हों, तो गुण मिलान में नाड़ी के 0 अंक मिलते हैं — इसे नाड़ी दोष कहते हैं।

नाड़ी दोष के कितने अंक होते हैं?

36 गुणों में से 8 — अष्टकूट में सबसे अधिक। नाड़ी अलग हो तो 8 और एक हो तो 0।

नाड़ी दोष कब नहीं लगता?

परंपरा में एक ही राशि पर अलग नक्षत्र, एक ही नक्षत्र पर अलग राशि, या एक ही नक्षत्र पर अलग चरण होने पर नाड़ी दोष नहीं माना जाता।

क्या नाड़ी दोष का संबंध ब्लड ग्रुप से है?

नहीं, इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। नाड़ी दोष एक परंपरागत ज्योतिषीय नियम है। स्वास्थ्य संबंधी चिंता हो तो चिकित्सीय जाँच करवाएँ।

मेरा नक्षत्र रोहिणी है, मेरी नाड़ी क्या है?

रोहिणी अंत्य नाड़ी का नक्षत्र है। अंत्य नाड़ी में कृत्तिका, रोहिणी, आश्लेषा, मघा, स्वाति, विशाखा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण और रेवती आते हैं।