गोचर

मंगल गोचर — मंगल का राशि परिवर्तन आपके लिए कैसा है, कैसे जानें

लेखक: एस्ट्रो रामजी (Astro Raamji) · · 3 मिनट पढ़ें

मंगल गोचर का फल

संक्षेप में

मंगल सामान्यतः लगभग 45 दिन एक राशि में रहता है, पर वक्री होने वाले वर्षों में किसी राशि में 6–7 महीने तक भी रुक सकता है। परंपरा में जन्म चंद्र राशि से 3, 6 और 11वें भाव में मंगल का गोचर शुभ माना जाता है। बृहत्पाराशर होराशास्त्र (70.24–26) के अनुसार मंगल के अष्टकवर्ग से भाई-बहन, साहस और भूमि का विचार होता है; जिस राशि में मंगल के अंक अधिक हों वहाँ उसका गोचर भूमि-लाभ और सुख देता है, और जहाँ अंक क्षीण हों वहाँ हानि।

मंगल गोचर की अवधि

मंगल सूर्य की परिक्रमा लगभग 687 दिन में करता है, इसलिए एक राशि में औसतन लगभग 45 दिन रहता है। पर लगभग हर 26 महीने में मंगल लगभग ढाई महीने के लिए वक्री होता है; उस समय वह किसी राशि में 6–7 महीने तक रुक सकता है। ऐसे वर्षों में मंगल का गोचर उस राशि वालों के लिए लंबा और अधिक प्रभावी होता है।

चंद्र राशि से भाव: परंपरा का नियम

गोचर ग्रंथों की परंपरा में मंगल का गोचर जन्म चंद्र राशि से:

  • 3, 6, 11वें भाव में: शुभ — साहस, शत्रु पर विजय, प्रतियोगिता में सफलता, लाभ।
  • 1, 4, 7, 8, 12वें भाव में: सावधानी — क्रोध, चोट, विवाद, स्वास्थ्य और संबंधों में तनाव।
  • बाकी भावों में मिश्रित।

पराशर: मंगल का अष्टकवर्ग

भौमाष्टवर्गे संचिन्त्यं भ्रातृविक्रमधैर्यकम् ।
कुजाश्रितात् तृतीयर्क्षं बुधैर्भ्रातृगृहं स्मृतम् ॥ २४॥
बृहत्पाराशर होराशास्त्र · अध्याय 70 (अष्टकवर्गफलाध्यायः) · श्लोक 24

अर्थ: मंगल के अष्टकवर्ग से भाई-बहन, पराक्रम और धैर्य का विचार करें; मंगल जिस राशि में है उससे तीसरी राशि भाइयों का घर मानी गई है।

त्रिकोणशोधनं कृत्वा यत्र स्यादधिकं फलम् ।
भूमेर्लाभोऽत्र भार्याया भ्रातृणां सुखमुत्तमम् ॥ २५॥
बृहत्पाराशर होराशास्त्र · अध्याय 70 (अष्टकवर्गफलाध्यायः) · श्लोक 25

अर्थ: त्रिकोण-शोधन करने के बाद जिस राशि में अधिक अंक हों, (वहाँ मंगल के गोचर में) भूमि का लाभ, पत्नी का सुख और भाइयों का उत्तम सुख होता है।

भौमो बलविहीनश्चद् दीर्घायुर्भातृको भवेत् ।
फलानि यत्र क्षीयन्ते तत्र भौमे गते क्षतिह् ॥ २६॥
बृहत्पाराशर होराशास्त्र · अध्याय 70 (अष्टकवर्गफलाध्यायः) · श्लोक 26

अर्थ: मंगल बलहीन हो तो भाई दीर्घायु होते हैं; और जिस राशि में अंक क्षीण हों, वहाँ मंगल के जाने पर हानि होती है।

इसलिए चंद्र राशि से "खराब" भाव में भी, यदि उस राशि में मंगल के अष्टकवर्ग के अंक अधिक हों, तो गोचर का फल उतना कठिन नहीं होता। यह नियम हमारे लेख अष्टकवर्ग और गुरु गोचर में भी विस्तार से है।

मंगल गोचर में सावधानियाँ

  • वाहन, आग, बिजली और धारदार औज़ारों के साथ विशेष सावधानी।
  • क्रोध में बड़े निर्णय और विवाद टालें।
  • रक्तचाप, बुखार, सूजन या चोट जैसी परेशानियों में समय पर डॉक्टर से मिलें।
  • सर्जरी जैसे निर्णय चिकित्सक की सलाह पर लें; ज्योतिष केवल समय की सहायक जानकारी देता है।

उपाय

  • मंगल के 10,000 जप, खैर की समिधा से हवन, और दक्षिणा में बैल या उसके बराबर दान (बृहत्पाराशर होराशास्त्र 84.19–25)।
  • परंपरा में मंगलवार को हनुमान उपासना और सुंदरकांड का पाठ।
  • रक्तदान — परंपरा में मंगल से जुड़ा सबसे उपयोगी दान माना जाता है।
  • नियमित व्यायाम — मंगल की ऊर्जा का सबसे अच्छा उपयोग।

अपनी चंद्र राशि और मंगल का अष्टकवर्ग मुफ़्त जन्म पत्रिका में देखें।

पूछे जाने वाले प्रश्न

मंगल एक राशि में कितने दिन रहता है?

सामान्यतः लगभग 45 दिन। वक्री होने वाले वर्षों में किसी राशि में 6–7 महीने तक भी रह सकता है।

चंद्र राशि से किन भावों में मंगल गोचर शुभ है?

परंपरा में 3, 6 और 11वें भाव में।

मंगल के अष्टकवर्ग से क्या देखा जाता है?

बृहत्पाराशर होराशास्त्र (70.24–26) के अनुसार भाई-बहन, साहस, धैर्य और भूमि। अधिक अंक वाली राशि में मंगल का गोचर भूमि-लाभ और सुख देता है।

मंगल गोचर का उपाय क्या है?

मंगल का जप-हवन (84.19–25), हनुमान उपासना, रक्तदान और नियमित व्यायाम।