राजयोग व धनयोग

महाभाग्य योग — पुरुष और स्त्री के लिए अलग शर्तें, और इसका शास्त्रीय संदर्भ

लेखक: एस्ट्रो रामजी (Astro Raamji) · · 3 मिनट पढ़ें

महाभाग्य योग

संक्षेप में

महाभाग्य योग पुरुष के लिए तब बनता है जब जन्म दिन में हो और लग्न, सूर्य तथा चंद्रमा तीनों विषम राशियों (मेष, मिथुन, सिंह, तुला, धनु, कुंभ) में हों; स्त्री के लिए जब जन्म रात में हो और तीनों सम राशियों (वृष, कर्क, कन्या, वृश्चिक, मकर, मीन) में हों। यह योग बाद के होरा ग्रंथों और परंपरा से प्रचलित है; बृहत्पाराशर होराशास्त्र के हमारे पाठ में इस नाम से नहीं है, पर पराशर दिन और रात के जन्म के लिए चंद्रमा के अलग नियम देते हैं (37.2–3)।

महाभाग्य योग की शर्तें

पुरुष की कुंडली में:

  • जन्म दिन में (सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच) हो।
  • लग्न, सूर्य और चंद्रमा तीनों विषम राशियों में हों — मेष, मिथुन, सिंह, तुला, धनु, कुंभ।

स्त्री की कुंडली में:

  • जन्म रात में (सूर्यास्त और सूर्योदय के बीच) हो।
  • लग्न, सूर्य और चंद्रमा तीनों सम राशियों में हों — वृष, कर्क, कन्या, वृश्चिक, मकर, मीन।

तर्क यह है कि विषम राशियाँ पुरुष और सम राशियाँ स्त्री स्वभाव की मानी गई हैं, और दिन सूर्य का तथा रात चंद्रमा का समय है। जब जन्म का समय, लिंग और तीनों मुख्य बिंदु एक ही स्वभाव में हों, तो इसे "महान भाग्य" का योग कहा गया।

स्रोत

महाभाग्य योग बाद के होरा ग्रंथों और परंपरा से प्रचलित है। बृहत्पाराशर होराशास्त्र के हमारे संस्कृत पाठ में "महाभाग्य" नाम का योग नहीं है। पर पराशर दिन और रात के जन्म के लिए चंद्रमा के अलग नियम देते हैं, जो इसी सोच से मेल खाते हैं:

स्वांशे वा स्वाधिमित्रांशे स्थितश्च दिवसे शशी ।
गुरुणा दृश्यते तत्र जातो धनसुखान्वितः ॥ २॥
बृहत्पाराशर होराशास्त्र · अध्याय 37 (चन्द्रयोगाध्यायः) · श्लोक 2

अर्थ: दिन के जन्म में चंद्रमा अपने या अधिमित्र के नवांश में हो और गुरु उसे देखे, तो जातक धन और सुख से युक्त होता है।

स्वांशे वा स्वाधिमित्रांशे स्थितश्च शशभृन्निशि ।
शुक्रेण दृश्यते तत्र जातो धनसुखान्वितः ॥ ३॥
बृहत्पाराशर होराशास्त्र · अध्याय 37 (चन्द्रयोगाध्यायः) · श्लोक 3

अर्थ: रात के जन्म में चंद्रमा अपने या अधिमित्र के नवांश में हो और शुक्र उसे देखे, तो जातक धन और सुख से युक्त होता है।

फल

परंपरा में महाभाग्य योग वाला व्यक्ति भाग्यशाली, प्रसिद्ध, उदार, दीर्घायु और समाज में सम्मानित बताया गया है।

डरने या घमंड करने से पहले

  • यह योग काफ़ी लोगों में बनता है — लगभग आधे लोग दिन में जन्म लेते हैं, और तीन बिंदुओं का एक ही प्रकार की राशि में होना असामान्य नहीं।
  • इसलिए इसे अकेले "महान भाग्य" का प्रमाण न मानें। लग्नेश का बल, नवम भाव (भाग्य) और नवमेश, और दशाएँ देखें।
  • दिन-रात का निर्णय स्थानीय सूर्योदय-सूर्यास्त से होता है, घड़ी के 6 बजे से नहीं।

अपनी कुंडली में लग्न, सूर्य और चंद्रमा की राशियाँ मुफ़्त जन्म पत्रिका में देखें।

पूछे जाने वाले प्रश्न

महाभाग्य योग कैसे बनता है?

पुरुष के लिए दिन में जन्म और लग्न, सूर्य, चंद्र तीनों विषम राशियों में; स्त्री के लिए रात में जन्म और तीनों सम राशियों में।

क्या महाभाग्य योग बृहत्पाराशर होराशास्त्र में है?

इस नाम से हमारे संस्कृत पाठ में नहीं। यह बाद के होरा ग्रंथों और परंपरा से प्रचलित है। पराशर दिन-रात के जन्म के लिए चंद्रमा के अलग नियम देते हैं (37.2–3)।

विषम और सम राशियाँ कौन सी हैं?

विषम — मेष, मिथुन, सिंह, तुला, धनु, कुंभ; सम — वृष, कर्क, कन्या, वृश्चिक, मकर, मीन।

दिन या रात का जन्म कैसे तय होता है?

जन्म स्थान के स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त से, घड़ी के निश्चित समय से नहीं।