राजयोग व धनयोग

इन्दु लग्न — धन का विशेष लग्न कैसे निकालें, कला-अंक सहित

लेखक: एस्ट्रो रामजी (Astro Raamji) · · 3 मिनट पढ़ें

इन्दु लग्न

संक्षेप में

इन्दु लग्न धन के विचार का एक विशेष लग्न है, जो फलदीपिका जैसे बाद के ग्रंथों से प्रचलित है; बृहत्पाराशर होराशास्त्र में इसका नाम नहीं है। गणना: लग्न से नवमेश और चंद्र से नवमेश की कला-संख्या जोड़ें (सूर्य 30, चंद्र 16, मंगल 6, बुध 8, गुरु 10, शुक्र 12, शनि 1), योग को 12 से भाग दें, और शेष जितनी राशि चंद्रमा से गिनें — वही इन्दु लग्न है। इन्दु लग्न में शुभ ग्रह हों तो धन का अच्छा योग माना जाता है।

इन्दु लग्न क्या है?

"इन्दु" चंद्रमा का नाम है। इन्दु लग्न चंद्रमा से गिनकर निकाला जाने वाला एक विशेष बिंदु है, जिससे धन और समृद्धि का विचार किया जाता है।

स्रोत: इन्दु लग्न फलदीपिका जैसे बाद के ग्रंथों से प्रचलित है। बृहत्पाराशर होराशास्त्र के हमारे संस्कृत पाठ में इसका नाम नहीं है। इसलिए इसे पराशर के धन योगों के साथ पढ़ें, उनके स्थान पर नहीं।

ग्रहों की कला-संख्या

हर ग्रह को एक निश्चित कला-संख्या दी गई है (राहु-केतु को नहीं):

  • सूर्य: 30
  • चंद्र: 16
  • मंगल: 6
  • बुध: 8
  • गुरु: 10
  • शुक्र: 12
  • शनि: 1

गणना के चार चरण

  • 1. लग्न से नौवें भाव का स्वामी (नवमेश) देखें, और उसकी कला-संख्या लें।
  • 2. चंद्रमा से नौवें भाव का स्वामी देखें, और उसकी कला-संख्या लें।
  • 3. दोनों को जोड़ें। योग 12 से अधिक हो तो 12 से भाग देकर शेष लें (शेष 0 आए तो 12 मानें)।
  • 4. चंद्रमा की राशि से उतनी राशि गिनें (चंद्र राशि को 1 मानकर) — वही इन्दु लग्न है।

उदाहरण

लग्न मेष, चंद्रमा कर्क में।

  • लग्न से नौवाँ भाव धनु → स्वामी गुरु → 10 कला।
  • चंद्र (कर्क) से नौवाँ भाव मीन → स्वामी गुरु → 10 कला।
  • 10 + 10 = 20 → 20 ÷ 12 का शेष = 8।
  • कर्क से 8 राशि: कर्क (1), सिंह (2), कन्या (3), तुला (4), वृश्चिक (5), धनु (6), मकर (7), कुंभ (8) — इन्दु लग्न = कुंभ।

इन्दु लग्न कैसे पढ़ें?

परंपरा में:

  • इन्दु लग्न में शुभ ग्रह (गुरु, शुक्र, बुध, बलवान चंद्र) हों, तो धन का अच्छा योग।
  • इन्दु लग्न में उच्च या स्वराशि का ग्रह विशेष शुभ।
  • पाप ग्रह भी उच्च हों तो धन देते हैं, पर संघर्ष के बाद।
  • इन्दु लग्न में बैठे या उसे देखने वाले ग्रहों की दशा में धन-लाभ।

पराशर के धन योगों के साथ

धन का मुख्य विचार पराशर के नियमों से ही करें — दूसरा भाव (धन), ग्यारहवाँ भाव (लाभ), नवम भाव (भाग्य), और इनके स्वामियों का संबंध। पराशर विशेषधनयोगाध्याय (41) में ऐसे योग देते हैं, जैसे:

पण्चमे च रविक्षेत्रे तस्मिन् रवियुते सति ।
लाभे शनीन्दुजीवाढ्ये बहुद्रव्यस्य नायकः ॥ ४॥
बृहत्पाराशर होराशास्त्र · अध्याय 41 (विशेषधनयोगाऽध्यायः) · श्लोक 4

अर्थ: पाँचवें भाव में सूर्य की राशि (सिंह) हो और उसमें सूर्य हो, तथा ग्यारहवें भाव में शनि, चंद्र और गुरु हों, तो जातक बहुत धन का स्वामी होता है।

धन की कमी के योग और उनका भंग हमारे लेख दरिद्र योग में हैं।

अपनी कुंडली में नवमेश और चंद्रमा की स्थिति मुफ़्त जन्म पत्रिका में देखें।

पूछे जाने वाले प्रश्न

इन्दु लग्न कैसे निकालते हैं?

लग्न से नवमेश और चंद्र से नवमेश की कला-संख्या जोड़ें, 12 से भाग देकर शेष लें, और चंद्र राशि से उतनी राशि गिनें।

ग्रहों की कला-संख्या क्या है?

सूर्य 30, चंद्र 16, मंगल 6, बुध 8, गुरु 10, शुक्र 12 और शनि 1। राहु-केतु को कला नहीं दी गई।

क्या इन्दु लग्न बृहत्पाराशर होराशास्त्र में है?

नहीं। यह फलदीपिका जैसे बाद के ग्रंथों से प्रचलित है। धन का मुख्य विचार पराशर के धन योगों से करें।

इन्दु लग्न में कौन से ग्रह शुभ हैं?

परंपरा में गुरु, शुक्र, बुध और बलवान चंद्रमा, विशेषकर उच्च या स्वराशि में।