गोचर

गुरु गोचर — बृहस्पति का राशि परिवर्तन आपके लिए शुभ है या नहीं, कैसे जानें

लेखक: एस्ट्रो रामजी (Astro Raamji) · · 3 मिनट पढ़ें

गुरु गोचर का फल

संक्षेप में

गुरु लगभग 12–13 महीने एक राशि में रहता है। परंपरा में जन्म चंद्र राशि से 2, 5, 7, 9 और 11वें भाव में गुरु का गोचर शुभ माना जाता है। पर बृहत्पाराशर होराशास्त्र (70.20) के अनुसार जिस राशि में अष्टकवर्ग की रेखाएँ (शुभ अंक) अधिक हों, वहाँ सूर्य या गुरु का गोचर सामान्य नियम से अनिष्ट होने पर भी शुभ कार्य किए जा सकते हैं — यानी गोचर का अंतिम निर्णय अष्टकवर्ग और दशा से होता है।

गुरु गोचर क्या है?

"गोचर" यानी ग्रहों की वर्तमान चाल। गुरु लगभग 12 वर्ष में राशिचक्र पूरा करता है, इसलिए एक राशि में लगभग 12–13 महीने रहता है (वक्री होने से यह कभी-कभी आगे-पीछे होता है)। गुरु ज्ञान, संतान, धन, विवाह (विशेषकर स्त्री के लिए) और भाग्य का कारक है, इसलिए उसका राशि परिवर्तन बड़ी घटना माना जाता है।

चंद्र राशि से भाव: परंपरा का नियम

गोचर का फल प्रायः जन्म चंद्र राशि से गिना जाता है। गोचर ग्रंथों की परंपरा में गुरु का गोचर चंद्र से:

  • 2, 5, 7, 9, 11वें भाव में: शुभ — धन, संतान, विवाह, भाग्य और लाभ।
  • 1, 3, 4, 6, 8, 10, 12वें भाव में: कम शुभ या कठिन।

परंपरा में "वेध" का नियम भी है — जैसे पाँचवें भाव का शुभ गोचर तब कमज़ोर हो जाता है जब उसी समय कोई दूसरा ग्रह वेध स्थान में हो।

पराशर: अष्टकवर्ग गोचर से ऊपर है

यह सबसे महत्वपूर्ण बात है, और बहुत कम बताई जाती है:

सूर्याष्टवर्गे यञ्छून्यं तन्मासे वस्तरेऽपि च ।
विवाहव्रतचूडादि शुभकर्म परित्यजेत् ॥ १९॥
बृहत्पाराशर होराशास्त्र · अध्याय 70 (अष्टकवर्गफलाध्यायः) · श्लोक 19
यत्र रेखाधिका तत्र मासे संवचरेऽपि च ।
अनिष्टेऽपि रवौ जीवे शुभकर्म समाचरेत् ॥ २०॥
बृहत्पाराशर होराशास्त्र · अध्याय 70 (अष्टकवर्गफलाध्यायः) · श्लोक 20

अर्थ: सूर्य के अष्टकवर्ग में जिस राशि में शून्य (कोई अंक नहीं) हो, उस मास और वर्ष में विवाह, व्रत, मुंडन जैसे शुभ कर्म छोड़ दें। और जहाँ रेखाएँ अधिक हों, उस मास और संवत्सर में — सूर्य या गुरु के अनिष्ट होने पर भी — शुभ कर्म करें।

यानी चंद्र राशि से गुरु "खराब" भाव में हो, पर गुरु जिस राशि से गुज़र रहा है उसमें अष्टकवर्ग के अंक अधिक हों, तो वह गोचर शुभ फल दे सकता है। उलटा भी सच है — शुभ भाव में भी कम अंक वाली राशि में गुरु पूरा फल नहीं देता।

गुरु के अष्टकवर्ग से संतान

जीवात् पञ्चमतो ज्ञानं धर्मं पुत्रं च चिन्तयेत् ।
तस्मिन् फलाधिके राशौ सन्तानस्य सुखं दिशेत् ॥ ३०॥
बृहत्पाराशर होराशास्त्र · अध्याय 70 (अष्टकवर्गफलाध्यायः) · श्लोक 30

अर्थ: गुरु से पाँचवें स्थान से ज्ञान, धर्म और पुत्र का विचार करें; उस राशि में अंक अधिक हों तो संतान का सुख कहें।

गोचर और दशा

  • गोचर "मौसम" है और दशा "ऋतु"। अच्छा गोचर तब पूरा फल देता है जब दशा भी साथ दे।
  • गुरु की महादशा या अंतर्दशा चल रही हो, तो गुरु का गोचर अधिक स्पष्ट फल देता है।
  • जन्म कुंडली में गुरु बलवान हो, तो कठिन गोचर भी हल्का पड़ता है।

अपने लिए गुरु गोचर कैसे देखें?

  • अपनी जन्म चंद्र राशि जानें।
  • गिनें कि गुरु अभी उससे किस भाव में है।
  • गुरु के भिन्नाष्टकवर्ग और सर्वाष्टकवर्ग में उस राशि के अंक देखें — अधिक अंक हों तो शुभ।
  • अपनी चल रही दशा देखें।

अष्टकवर्ग के नियम हमारे लेख अष्टकवर्ग में हैं। अपनी चंद्र राशि, अष्टकवर्ग और दशा मुफ़्त जन्म पत्रिका में देखें।

पूछे जाने वाले प्रश्न

गुरु एक राशि में कितने समय रहता है?

लगभग 12–13 महीने। वक्री होने पर यह समय कुछ आगे-पीछे हो सकता है।

चंद्र राशि से किन भावों में गुरु गोचर शुभ है?

परंपरा में 2, 5, 7, 9 और 11वें भाव में।

क्या अष्टकवर्ग गोचर का फल बदल सकता है?

हाँ। बृहत्पाराशर होराशास्त्र (70.20) के अनुसार जहाँ अष्टकवर्ग की रेखाएँ अधिक हों, वहाँ सूर्य या गुरु के अनिष्ट गोचर में भी शुभ कर्म किए जा सकते हैं।

गुरु गोचर का फल कब अधिक मिलता है?

जब गुरु की दशा-अंतर्दशा चल रही हो और गोचर की राशि में अष्टकवर्ग के अंक अधिक हों।