दशा व गणित

चंद्रमा की सटीक स्थिति — छोटे सूत्र से कुंडली, नक्षत्र-पाद और दशा-शेष में कितनी गलती होती है

लेखक: एस्ट्रो रामजी (Astro Raamji) · · 3 मिनट पढ़ें

चंद्र स्पष्ट का गणित

संक्षेप में

चंद्रमा की गति सबसे अनियमित है — मुख्य असमानताएँ हैं मंद-फल (लगभग 6.29°), इवेक्शन (1.27°), वेरिएशन (0.66°) और वार्षिक समीकरण (0.19°)। केवल चार-पाँच पदों वाले छोटे सूत्र से चंद्रमा में 0.1°–0.3° तक की गलती रह सकती है, जबकि Jean Meeus की "Astronomical Algorithms" का 60-पद सिद्धांत लगभग 10 विकला तक सटीक है। 0.2° की गलती से विंशोत्तरी दशा-शेष में कई महीनों का अंतर और चंद्रमा का D60 बदल सकता है।

चंद्रमा की गणना इतनी कठिन क्यों?

चंद्रमा पृथ्वी के सबसे पास है और सूर्य, पृथ्वी दोनों के गुरुत्व से खिंचता है। इसलिए उसकी गति बहुत अनियमित है — कभी तेज़, कभी धीमी। चंद्रमा प्रतिदिन लगभग 12° से 15° तक चलता है, और कुंडली में सबसे तेज़ बदलने वाला बिंदु (लग्न के बाद) वही है।

महर्षि पराशर का सिद्धांत स्पष्ट है:

यस्मिन् काले यतः खेटा यान्ति दृग्गणितैकताम् ।
तत एव स्फुटाः कार्याः दिक्कालौ च स्फुटौ विदा ॥ ८॥
बृहत्पाराशर होराशास्त्र · अध्याय 3 (ग्रहगुणस्वरूपाध्यायः) · श्लोक 8

अर्थ: जिस समय जिस स्थान से ग्रह जहाँ दिखते हैं, गणना उसी से मेल खानी चाहिए — ग्रह-स्पष्ट, दिशा और काल सब स्पष्ट हों।

यानी कुंडली का चंद्रमा वहीं होना चाहिए जहाँ वह आकाश में वास्तव में था।

चंद्रमा की मुख्य असमानताएँ

चंद्रमा की औसत स्थिति में ये बड़े सुधार जोड़ने पड़ते हैं:

  • मंद-फल (equation of centre): लगभग 6.29° — कक्षा अंडाकार होने से।
  • इवेक्शन: लगभग 1.27° — सूर्य के खिंचाव से कक्षा का आकार बदलना।
  • वेरिएशन: लगभग 0.66° — अमावस्या-पूर्णिमा के बीच गति का बदलना।
  • वार्षिक समीकरण: लगभग 0.19° — पृथ्वी-सूर्य की दूरी बदलने से।

इनके बाद भी दर्जनों छोटे पद बचते हैं, जिनमें से कई 0.01°–0.2° के हैं।

छोटे सूत्र बनाम 60-पद सिद्धांत

  • छोटे सूत्र (केवल ऊपर के चार-पाँच पद): चंद्रमा में 0.1°–0.3° तक की गलती।
  • Jean Meeus, "Astronomical Algorithms" (अध्याय 47): चंद्र-देशांतर के लिए 60 पद, जो ELP-2000/82 सिद्धांत पर आधारित हैं — सटीकता लगभग 10 विकला (0.003°)।
  • आधुनिक पूर्ण सिद्धांत (जैसे Swiss Ephemeris में प्रयुक्त JPL डेटा): और भी सूक्ष्म।

0.2° की गलती से क्या बदलता है?

  • नक्षत्र और पाद: पाद 3°20′ का है। चंद्रमा संधि के पास हो तो पाद या नक्षत्र ही बदल सकता है — और उसके साथ जन्म नक्षत्र, नाम-अक्षर और गुण मिलान।
  • विंशोत्तरी दशा-शेष: एक नक्षत्र 13°20′ का है। उदाहरण: शुक्र (20 वर्ष) के नक्षत्र में 0.2° की गलती = 0.2 ÷ 13.33 × 20 ≈ 0.3 वर्ष, यानी लगभग 3–4 महीने का अंतर पूरी दशा-श्रृंखला में।
  • वर्ग चार्ट: चंद्रमा का D60 (30′ का भाग) सीधे बदल सकता है; D9, D10 भी संधि के पास बदल सकते हैं।
  • तिथि: तिथि सूर्य-चंद्र के अंतर से है; संधि के पास तिथि भी बदल सकती है।

सटीक चंद्रमा के लिए क्या ज़रूरी है?

  • पूर्ण चंद्र सिद्धांत (कम से कम Meeus के 60 पद, या उससे सटीक)।
  • सही अयनांश — हमारा लेख चित्रा पक्ष अयनांश देखें।
  • सही जन्म समय और समय-क्षेत्र — चंद्रमा 2 घंटे में लगभग 1° चलता है।

हमारी मुफ़्त जन्म पत्रिका Swiss Ephemeris (JPL DE431 आधारित) और सत्य चित्रा पक्ष अयनांश से बनती है — जो Meeus के 60 पदों से भी अधिक सटीक है। दशा-शेष की गणना हमारे लेख विंशोत्तरी दशा में है।

पूछे जाने वाले प्रश्न

चंद्रमा की गणना कठिन क्यों है?

क्योंकि सूर्य और पृथ्वी दोनों के खिंचाव से उसकी गति बहुत अनियमित है। मुख्य सुधार हैं मंद-फल (6.29°), इवेक्शन (1.27°), वेरिएशन (0.66°) और वार्षिक समीकरण (0.19°)।

Meeus का 60-पद सिद्धांत क्या है?

Jean Meeus की पुस्तक "Astronomical Algorithms" (अध्याय 47) में चंद्र-देशांतर के 60 पद, जो ELP-2000/82 पर आधारित हैं और लगभग 10 विकला तक सटीक हैं।

छोटे सूत्र से कितनी गलती होती है?

चार-पाँच पदों वाले सूत्र से चंद्रमा में 0.1°–0.3° तक की गलती रह सकती है।

चंद्रमा की 0.2° गलती से दशा में कितना फर्क पड़ता है?

20 वर्ष वाली शुक्र दशा के नक्षत्र में लगभग 0.3 वर्ष, यानी 3–4 महीने का अंतर पूरी दशा-श्रृंखला में।