अष्टकवर्ग — सर्वाष्टकवर्ग के अंक कैसे पढ़ें, बृहत्पाराशर होराशास्त्र के अनुसार
संक्षेप में
अष्टकवर्ग में सात ग्रह और लग्न — इन आठ बिंदुओं से हर राशि को शुभ अंक (बिंदु) मिलते हैं, और सबका योग सर्वाष्टकवर्ग (समुदाय अष्टकवर्ग) कहलाता है, जिसका कुल हमेशा 337 होता है। बृहत्पाराशर होराशास्त्र (72.3–5) के अनुसार जिस राशि में 30 से अधिक अंक हों वह शुभ, 25 से 30 मध्यम, और 25 से कम कष्टदायक है; शुभ कार्य श्रेष्ठ अंक वाली राशियों में करें और कष्ट राशियों से बचें।
अष्टकवर्ग क्या है?
पराशर अष्टकवर्गाध्याय (66) की शुरुआत में मैत्रेय का प्रश्न रखते हैं — ग्रहों और भावों के फल इतने मिले-जुले हैं कि साधारण बुद्धि वाला व्यक्ति निश्चित निर्णय नहीं कर पाता, इसलिए कोई सरल शास्त्र बताइए:
कलौ पापरतानां च मन्दा बुद्धिर्युतो नृणाम् ।
अतोऽल्पबुद्धिगम्यं यत् शास्त्रमेतद् वदस्य मे ॥ ३॥तत्तत्कालग्रहस्थित्या मानवानां परिस्फुटम् ।
सुखदुःखपरिज्ञानमायुषो निर्णयं तथा ॥ ४॥अर्थ: कलियुग में मनुष्यों की बुद्धि मंद है, इसलिए ऐसा शास्त्र बताइए जो अल्पबुद्धि वालों की समझ में भी आए — जिससे उस-उस समय की ग्रह-स्थिति से सुख-दुःख और आयु का स्पष्ट निर्णय हो सके।
उत्तर में पराशर अष्टकवर्ग बताते हैं — एक अंक-आधारित पद्धति, जिसमें हर राशि की शुभता एक संख्या से दिखती है।
अंक कैसे बनते हैं?
- सात ग्रह (सूर्य से शनि) और लग्न — ये आठ संदर्भ बिंदु हैं, इसलिए नाम "अष्टक-वर्ग"।
- हर ग्रह के लिए एक भिन्नाष्टकवर्ग बनता है: आठों संदर्भों से कुछ निश्चित भावों में उस ग्रह को एक-एक शुभ अंक (बिंदु) मिलता है।
- सातों ग्रहों के भिन्नाष्टकवर्ग जोड़ने पर सर्वाष्टकवर्ग बनता है। इसका कुल योग हर कुंडली में 337 होता है।
- 12 राशियों में औसत = 337 ÷ 12 ≈ 28 — इसीलिए "28 से ऊपर अच्छा" का प्रचलित नियम है।
पराशर का नियम: 30 और 25
द्वादशारं लिखेच्चकं जन्मलग्नादिभैर्युतम् ।
सर्वाष्टकफलान्यत्र संयोज्य प्रतिभं न्यसेत् ॥ १॥समुदायाभिधानोऽयमष्टवर्गः प्रकथ्यते ।
अतः फलानि जातानां विज्ञेयानि द्विजोत्तम ॥ २॥अर्थ: जन्म लग्न आदि राशियों वाला बारह खानों का चक्र बनाएँ और हर राशि में सभी अष्टकवर्गों के अंक जोड़कर लिखें — यही समुदाय अष्टकवर्ग है।
त्रिंशाधिकफला ये स्यू राशयस्ते शुभप्रदाः ।
पञ्चविंशादित्रिंशान्तफला मध्यफला स्मृताः ॥ ३॥अतः क्षीणफला ये ते राशयः कष्टदुःखदा ।
शुभे श्रेष्ठफलान् राशीन् योजयेन्मतिमान्नरः ॥ ४॥कष्टराशीन् सुकार्येषु वर्जयेद् द्विजसत्तम ।
श्रेष्ठराशिगतः खेटः शुभोऽन्यत्राऽशुभप्रदः ॥ ५॥अर्थ: जिन राशियों में 30 से अधिक अंक हों वे शुभ फल देती हैं, 25 से 30 वाली मध्यम, और उससे कम वाली कष्ट-दुःख देती हैं। बुद्धिमान व्यक्ति शुभ कार्य श्रेष्ठ अंक वाली राशियों में करे और कष्ट राशियों को अच्छे कामों में छोड़ दे। श्रेष्ठ राशि में स्थित ग्रह शुभ और अन्यत्र अशुभ फल देता है।
भावों पर उपयोग
लग्नं फलाधिकं यस्य भोगवानर्थवान् हि सः ।
विपरीतेन दारिद्र्यं भवत्येव न संशयः ॥ ८॥अर्थ: जिसके लग्न में अधिक अंक हों वह भोगी और धनवान होता है; उलटा हो तो निःसंदेह दरिद्रता।
इसी तरह हर भाव के अंक देखें — अधिक अंक वाला भाव फलता है और कम अंक वाला कमज़ोर रहता है (72.6–7)। पराशर यह भी कहते हैं कि ग्यारहवें भाव में दसवें से अधिक और बारहवें में ग्यारहवें से कम अंक हों, तो आय अच्छी और व्यय नियंत्रित रहता है (72.7 का भाव)।
गोचर में अष्टकवर्ग
अष्टकवर्ग का सबसे व्यावहारिक उपयोग गोचर में है:
- कोई ग्रह गोचर में जिस राशि से गुज़र रहा है, उस राशि में उसके भिन्नाष्टकवर्ग के अंक देखें। किसी राशि में अधिकतम 8 अंक हो सकते हैं, और परंपरा में 4 को मध्य माना जाता है — 4 से अधिक हों तो वह गोचर प्रायः शुभ, कम हों तो कठिन।
- साढ़े साती में भी शनि जिन राशियों से गुज़रता है, उनमें शनि के अंक अधिक हों तो वह चरण हल्का रहता है।
- शुभ कार्य, यात्रा या नए काम के समय अधिक अंक वाली राशियों में ग्रहों का गोचर देखें।
सावधानी
- अष्टकवर्ग गणना-आधारित है — एक भी ग्रह की राशि गलत हो तो अंक बदल जाते हैं।
- अष्टकवर्ग दशा और योगों का विकल्प नहीं, उनके साथ पुष्टि का साधन है।
हमारी मुफ़्त जन्म पत्रिका में सर्वाष्टकवर्ग और हर ग्रह का भिन्नाष्टकवर्ग अपने आप बनता है।
पूछे जाने वाले प्रश्न
अष्टकवर्ग क्या है?
सात ग्रहों और लग्न — आठ संदर्भ बिंदुओं — से हर राशि को मिलने वाले शुभ अंकों की पद्धति, जिसे पराशर ने अध्याय 66–72 में बताया है।
सर्वाष्टकवर्ग में कितने अंक अच्छे हैं?
पराशर (72.3–4) के अनुसार 30 से अधिक शुभ, 25 से 30 मध्यम, और 25 से कम कष्टदायक।
सर्वाष्टकवर्ग का कुल योग कितना होता है?
हर कुंडली में 337। बारह राशियों का औसत लगभग 28 आता है।
गोचर में अष्टकवर्ग कैसे देखें?
गोचर का ग्रह जिस राशि में है, उसमें उस ग्रह के भिन्नाष्टकवर्ग के अंक देखें। 4 से अधिक अंक हों तो गोचर प्रायः शुभ रहता है।